- भक्ति वेव संस्था के समारोह में बच्चों और युवाओं को सनातन संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा, कई टीवी शो में भी दर्ज करा चुके हैं उपस्थिति
- संगीतमय सुंदरकांड, दीपावली पूजन और समाजसेवियों का सम्मान; ‘भक्ति से सेवा, सेवा से परिवर्तन’ के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान
आगरा। महज छह वर्ष की उम्र में भक्ति और सनातन संस्कृति का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की पहल कर रहे बाल संत भक्त भागवत जी शनिवार को कमला नगर स्थित महाराजा अग्रसेन सेवा सदन में आयोजित ‘भक्ति वेव’ संस्था के "भक्ति एवं सनातन संस्कृति का दिव्य उत्सव" का प्रमुख आकर्षण रहे। कई टीवी शो में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके बाल संत ने अपने प्रेरक संदेश ‘हेलो-हाय छोड़ो, भक्ति से नाता जोड़ो’ के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा दी। इतनी कम उम्र में भक्ति के प्रति उनकी रुचि और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़ी सक्रियता ने समारोह को विशेष पहचान दी। संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बाल संत भक्त भागवत जी के प्रति प्रशंसा व्यक्त की है।
‘भक्ति वेव — सेवा, प्रसार, सनातन’ की ओर से आयोजित समारोह में बाल संत का स्वागत किया गया। उनके प्रवचन में भक्ति को जीवन में अपनाने और संस्कारों को व्यवहार का हिस्सा बनाने का संदेश प्रमुख रहा। संस्था का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों तक सीमित न रहकर सनातन संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
संस्था का ध्येय वाक्य ‘भक्ति से सेवा, सेवा से परिवर्तन’ उसकी मूल विचारधारा को अभिव्यक्त करता है। संस्था का मानना है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि यह व्यक्ति में संवेदनशीलता, सदाचार, सहयोग और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का माध्यम भी है। इसी उद्देश्य से संस्था धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के जरिए विभिन्न वर्गों को जोड़ने तथा बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए प्रयासरत है।
संस्था के संस्थापक संचित गोयल, अध्यक्ष जितेन्द्र गोयल,महामंत्री तुषार गोयल,व कोषाध्यक्ष हरीश गोयल ने बताया कि भक्ति वेव की स्थापना का विचार मित्रता दिवस पर चार मित्रों के बीच हुई चर्चा से जन्मा। विचार था कि सनातन संस्कृति, सेवा और समाजहित को केंद्र में रखकर ऐसी पहल की जाए, जो लोगों को आपस में जोड़े और आने वाली पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से परिचित कराए। इसी सामूहिक सोच ने भक्ति वेव संस्था का स्वरूप लिया। आज यह एक परिवार का रूप बनता जा रहा है। रही अब संस्था भक्ति, संस्कार और सेवा को एक साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
संगीतमय सुंदरकांड से गूंजा परिसर, दीपावली पूजन की विधि बताई
समारोह का शुभारंभ पंडित सुभाष चंद्र शास्त्री के सान्निध्य में संगीतमय सुंदरकांड पाठ से हुआ। श्रीराम के गुणगान और भक्ति संगीत से वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके बाद उन्होंने दीपावली पूजन की विधि, मंत्रोच्चारण के महत्व और सनातन परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने श्रद्धालुओं को दीपावली के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व से भी परिचित कराया।
इसके बाद बाल संत भक्त भागवत जी का आगमन हुआ। उन्होंने भक्ति से जुड़ने और संस्कारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में धारावाहिक महाभारत में गुरू द्रोणाचार्य की भूमिका निभाने वाले सुरेंद्र पाल सिंह भी आकर्षण का केन्द्र रहे।
भक्ति वेव परिवार के सदस्यों तथा समाजसेवियों का सम्मान किया गया। अंत में भोजन प्रसादी वितरित की गई।
परिवारों में संस्कारों के संरक्षण पर जोर
समारोह में बच्चों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने में परिवारों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। संस्था का मानना है कि परिवार बच्चों की पहली पाठशाला है और घर में मिलने वाले संस्कार ही उनके व्यक्तित्व तथा सामाजिक व्यवहार की नींव रखते हैं। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से बच्चों को परंपराओं से परिचित कराने के साथ समाजसेवियों का सम्मान करना सेवा भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मार्गदर्शक नंदकिशोर गोयल, राजकुमार अग्रवाल, सलाहकार राजीव अग्रवाल, दिनेश मंगल, जितेन्द्र अग्रवाल, रवि कांत श्रोतिया, सौरभ जैन एडवोकेट, देवांश गोयल, महेंद्र गुप्ता, अंजली गोयल, प्रियंका गोयल, शालिनी गोयल, रूबी गोयल, विनीता अग्रवाल आदि की कार्यक्रम में सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन दीपक जैन ने किया।
