गणेश चतुर्थी पर घर-घर गूंजेगा गणपति बप्पा मोरया का जयघोष और शुरू होगी विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणपति की मूर्ति खरीदने से लेकर उनकी स्थापना, पूजा और विसर्जन तक कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बातें हैं, जिन्हें जानना हर भक्त के लिए जरूरी है?
मूर्ति का स्वरूप कैसा हो? सूंड किस दिशा में हो? घर में गणेश जी की स्थापना किस स्थान पर करनी चाहिए? पूजा की सही विधि क्या है और विसर्जन कितने दिन बाद किया जा सकता है?
इन्हीं तमाम सवालों के जवाब और गणेश चतुर्थी से जुड़ी जरूरी धार्मिक जानकारी साझा कर रही हैं ज्योतिष एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक अनीता पाराशर। तो आइए जानते हैं, गणपति स्थापना से पहले किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना से पहले जानें जरूरी बातें
मूर्ति के स्वरूप से लेकर स्थापना, पूजा और विसर्जन तक विशेष जानकारी
प्रश्न: बाजार से गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? क्या मूर्ति की मुद्रा, सूंड की दिशा और आकार का कोई धार्मिक महत्व है?
उत्तर: गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय सबसे पहले मूर्ति का स्वरूप शांत, प्रसन्न और सौम्य होना चाहिए। घर की पूजा के लिए बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति सामान्यतः अच्छी मानी जाती है। बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाली मूर्ति घरेलू पूजा में अधिक प्रचलित है। दाईं ओर मुड़ी सूंड को लेकर अलग-अलग परंपराओं में विशेष पूजा-विधि बताई जाती है, इसलिए ऐसी मूर्ति लें तो संबंधित परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।
मूर्ति का आकार घर के स्थान और पूजा की सुविधा के अनुरूप होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात मूर्ति की सुंदरता से अधिक श्रद्धा, स्वच्छता और पूजा का भाव है। गणेश चतुर्थी के लिए मिट्टी की पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति लेना भी उत्तम विकल्प है।
प्रश्न: घर में गणेश जी की स्थापना के लिए किस दिशा और स्थान को शुभ माना जाता है?
उत्तर: घर में गणेश जी की स्थापना के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को सामान्यतः शुभ माना जाता है। यदि वहां व्यवस्था संभव न हो तो स्वच्छ और शांत पूजा-स्थान में स्थापना की जा सकती है। मूर्ति को साफ चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाकर स्थापित करें।
गणेश जी की स्थापना शौचालय, सीढ़ियों के नीचे, जूते-चप्पलों के पास, अत्यधिक गंदे या अव्यवस्थित स्थान पर नहीं करनी चाहिए। मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय चौकी पर रखना उचित है।
प्रश्न: गणेश चतुर्थी के दिन स्थापना और पूजा की सही विधि क्या है?
उत्तर: सबसे पहले पूजा स्थान को स्वच्छ करके चौकी सजाएं। गणेश जी की मूर्ति स्थापित करके दीपक और धूप प्रज्वलित करें। संकल्प लेकर गणेश जी का आवाहन करें और जल, पंचामृत, चंदन, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, फल तथा मोदक आदि अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
मुख्य मंत्र है—
॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥
इसके साथ गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश स्तुति का पाठ भी श्रद्धानुसार किया जा सकता है। गणेश जी को दूर्वा और मोदक विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं।
प्रश्न: गणेश जी को कितने दिनों तक स्थापित रखना शुभ माना जाता है और विसर्जन की सही विधि क्या है?
उत्तर: गणपति स्थापना के बाद विसर्जन की अवधि के लिए कोई एक अनिवार्य नियम नहीं है। परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, 3, 5, 7, 9 या 11 दिन तक गणेश जी को रखकर विसर्जन किया जाता है। परिवार अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार अवधि तय कर सकता है।
विसर्जन से पहले गणेश जी की अंतिम पूजा, आरती और प्रसाद अर्पित करें। भगवान से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करके श्रद्धापूर्वक विदाई दें। पर्यावरण की दृष्टि से प्राकृतिक मिट्टी की मूर्ति का घर पर या निर्धारित कृत्रिम विसर्जन स्थल पर विसर्जन करना बेहतर है।
छोटी या बड़ी मूर्ति रखने से अपने-आप कोई अलग धार्मिक दोष नहीं बनता। मूर्ति का आकार घर में उपलब्ध स्थान, पूजा की सुविधा और विसर्जन की व्यवस्था को ध्यान में रखकर चुनना चाहिए।
प्रश्न: स्थापना या पूजा के दौरान कोई गलती हो जाए तो क्या दोष माना जाता है?
उत्तर: पूजा में अनजाने में कोई छोटी-मोटी गलती हो जाए तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। धार्मिक दृष्टि से श्रद्धा और भावना को बहुत महत्व दिया जाता है। गणेश जी के सामने अपनी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें और कहें—
“हे विघ्नहर्ता श्री गणेश जी, पूजा में जाने-अनजाने हुई त्रुटियों के लिए मुझे क्षमा करें और मेरी पूजा स्वीकार करें।”
इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करके आरती कर सकते हैं। जानबूझकर पूजा में लापरवाही करने के बजाय शुद्ध मन और श्रद्धा से पूजा करना अधिक महत्वपूर्ण है।
कुछ विशेष बातें
गणेश चतुर्थी केवल प्रतिमा स्थापित करने का पर्व नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक, विनम्रता और शुभ शुरुआत का संदेश देने वाला पर्व है। इस दिन घर में सकारात्मक वातावरण रखें, क्रोध और विवाद से बचें तथा जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।
सबसे महत्वपूर्ण है कि गणपति की पूजा दिखावे से नहीं, श्रद्धा और प्रेम से की जाए। गणपति बप्पा से सद्बुद्धि, सुख-शांति और परिवार की मंगलकामना करनी चाहिए।
— अनीता पाराशर
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक
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