हाथ सीता का राम को दिया…” गीत गाते-गाते भावुक हुए जनकपुरी महोत्सव के अध्यक्ष राजू यादव, छलक उठीं आंखें

 

जनकनंदिनी सीता की विदाई के भावुक क्षणों में जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव भी अपने आंसू नहीं रोक सके। मंच से अपने मन की बात साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्हें जनकपुरी महोत्सव की जिम्मेदारी सौंपी गई, उसके तुरंत बाद ही वह दुर्घटनाग्रस्त हो गए। उस कठिन समय में उन्होंने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा था कि प्रभु, आखिर उनसे ऐसा कौन-सा पाप हो गया कि उन्हें इस परिस्थिति से गुजरना पड़ रहा है। गंभीर चोटों के बावजूद आज मंच पर खड़े होकर मां जानकी को विदा करने का सौभाग्य मिला है, यह उनके लिए परम सौभाग्य की बात है।

उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों और मिथिलावासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अपनी भावनाएं व्यक्त करते-करते उनकी आंखें छलक उठीं और मुख से “हाथ सीता का राम को दिया…” गीत के बोल निकल पड़े। गीत गाते हुए वह इतने भावुक हो गए कि उपस्थित लोगों के हृदय भी द्रवित हो उठे। यह दृश्य जनकपुरी महोत्सव की विदाई बेला के सबसे मार्मिक क्षणों में शामिल हो गया।

मिथिला की कला को मिला सम्मान, मधुबनी पेंटिंग भेंट की

जनकपुरी महोत्सव में मिथिला की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत को भी सम्मान दिया गया। इस अवसर पर तीन फुट की मधुबनी पेंटिंग भेंट की गई, जो मिथिला की पारंपरिक चित्रकला, रंगों और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रही। 

नृत्य-नाटिका में साकार हुआ श्रीराम-जानकी विवाह का प्रसंग

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत दीपक जैन के निर्देशन में नृत्य-नाटिका के माध्यम से श्रीराम-जानकी विवाह का प्रसंग मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने विवाह की रस्मों, मिथिला के उल्लास और राम-सीता के पावन मिलन को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति में भक्ति, संगीत और अभिनय का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। विवाह के उल्लास से लेकर विदाई की भावुकता तक रामकथा के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।