इटावा | उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की जसवंतनगर तहसील में प्रशासनिक संवेदनशीलता और इंसानियत की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। पिछले दो दिनों से लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल के निर्देशों पर मैदानी निरीक्षण के लिए निकलीं जसवंतनगर की कर्मठ और लोकप्रिय तहसीलदार नेहा सचान ने बाढ़ और जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी जायजा लिया। इस दौरान वह क्षेत्र के जागसौड़ा गांव पहुंचीं, जहां उन्होंने स्थिति का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने बताया कि हालांकि बारिश की वजह से फसलों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन जलभराव के कारण जिन लोगों के घर गिरे या प्रभावित हुए हैं,उनका उन्होंने मौके पर जाकर उन सभी हालातों का जायजा लिया।
दफ्तरों की चारदीवारी से परे जाकर जब यह अधिकारी बाढ़ग्रस्त इलाकों में उतरीं, तो उन्होंने अपनी ड्यूटी को सिर्फ एक सरकारी कर्तव्य नहीं बल्कि इंसानियत का सबसे बड़ा धर्म माना। वह बाढ़ के पानी और विकट परिस्थितियों की परवाह किए बिना सीधे गांव के सबसे अंतिम छोर पर बैठे जरूरतमंदों के बीच जा पहुंचीं। इस दौरान एक बाढ़ पीड़ित बुजुर्ग महिला को उन्होंने जिस आत्मीयता के साथ गले लगाया और उनके आंसू पोंछे, वह दृश्य किसी का भी दिल पिघलाने के लिए काफी था। वह बाढ़ग्रस्त इलाकों में सिर्फ एक अधिकारी बनकर नहीं, बल्कि एक बेटी बनकर पहुंची थीं, जिन्होंने संकट के समय परिवार की तरह ढांढस बंधाया। उन्होंने हर ग्रामीण की पीड़ा को बेहद करीब से सुना और प्रशासन की तरफ से हरसंभव मदद, सुरक्षा और राहत का पूरा भरोसा दिलाया।
यह पहली बार नहीं है जब तहसीलदार नेहा सचान ने अपने इस सेवाभाव से लोगों का दिल जीता हो। कुछ ही दिन पहले इसी संवेदनशील अधिकारी ने एक बुजुर्ग महिला की 'फार्मर रजिस्ट्री' और नाम संशोधन जैसी जटिल समस्याओं का त्वरित निस्तारण कर उनके जीवन में खुशियां घोली थीं। आज जसवंतनगर की जनता अपनी इस लोकप्रिय तहसीलदार के जज्बे को दिल से सलाम कर रही है, जो यह साबित करता है कि अगर नीयत साफ हो और दिल में जनता के प्रति अपनापन हो, तो एक प्रशासनिक अधिकारी भी जनता के लिए भगवान का रूप बन सकता है।
