गाली देते जैन जी नहीं चाहिए, उन पर हम शर्मिंदा हैं, हमें संस्कारवान भारतीय चरित्र चाहिए

आगरा। जिम्मेदारियों से भागकर नई नकली दुनिया का निर्माण कर हम इस मौजूदा दुनिया को नहीं बदल सकते, नारी सृजक है, बहुत कुछ कर सकती है, परिवार को नारी की पहले जरूरत है, उसको प्राथमिकता दें। बच्चे की पहली शिक्षक मां होती है, बच्चे को बेहतरीन नागरिक बनाएं, तभी देश-समाज का भला होगा। जंतर मंतर वाले गाली देते जैन जी नहीं चाहिए, उन पर हम शर्मिंदा हैं, हमें संस्कारवान भारतीय चरित्र चाहिए। महिला सशक्तिकरण के नाम पर खानापूरी हो रही है। महिलाओं द्वारा जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं हो रहा है। यह विचार शिक्षाविद डॉ.महेश शर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेन ज़ी और नारी सशक्तिकरण विषय पर सेठ पदम चंद जैन संस्थान में एक गोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन में व्यक्त किए। एआई का जिक्र करते कहा जैसे कैलकुलेटर ने गणितीय बौद्धिक क्षमताओं का ह्रास किया वैसे ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी जीवन पर खतरनाक प्रभाव डालेगा। कार्यक्रम में डॉ.शशि तिवारी द्वारा मां जीया पर पुस्तक "मां जैसा कोई नहीं जीया: एक युग" के विमोचन किया गया। डॉ. शर्मा ने कहा संयोग देखें जीया दुनिया में 30 जून को जन्मी और 30 जून को ही 95 साल की उम्र में अलविदा कहकर गईं। 

मुख्य अतिथि डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा नारी भारत में सशक्त रही है, देवी का स्वरूप रही है। युग बदला है तो मान्यताएं भी बदली हैं, आज के युग के अनुरूप नारी को सशक्तिकरण की चुनौतियां स्वीकार करनी होगी। कवियत्री डॉ.शशि तिवारी ने पुरखों पर गर्व करने की परंपरा निभाकर मां को शब्दों में रेखांकित करने का प्रेरणादायक काम किया है। मुख्य वक्ता प्रो.कमलेश नागर ने जेन जी का जिक्र करते कहा दिल्ली के जंतर-मंतर पर गलियाँ देती किशोरियों-युवतियों को हम नारी सशक्तिकरण नहीं कह सकते। सड़क पर उच्छृंखल व्यवहार करना नारी सशक्तिकरण नहीं है। संचालक दिलीप रघुवंशी ने कहा कि विचार सबके अपने अलग होते हैं, पुरानी पीढ़ी हमेशा नई में कमियां निकालती आई है। आज जैन जी पीढ़ी के युवा हमारी पीढ़ी से बहुत आगे की सोचकर चल रहे हैं। उनसे भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। 

साहित्यकार डॉ. कुसुम चतुर्वेदी ने कहा जंतर-मंतर देखकर लगा, आंदोलन सलीके से नहीं हुआ। इसके लिए आभासी दुनिया जिम्मेदार है। जीया का जिक्र करते कहा "कुछ शख्शियतें ऐसी होती हैं जिनको यादों में ठहर जाने का हुनर आता है।" कविता सुनाई-"जब जब मिली मैं आपसे मुझको खुशियां मिली अपार, कैसे व्यक्त करूं मै उनको जिनका नहीं आर-पार...!"

डॉ. ज्योत्सना रघुवंशी ने कहा एआई जीवन में बड़ा बदलाव कर रहा है। एआई महिला सुरक्षा में सहयोग कर रहा है। स्वास्थ्य के मामले में भी उपयोग हो रहा है। नई तकनीक से कदमताल नहीं करेंगे तो पिछड़ जाएंगे। सोशल मीडिया की ताकत स्वीकारनी ही होगा, लेकिन दुष्प्रभावों से बचें। साइबर क्राइम बढ़ रहे हैं उनसे बचने के लिए जागरूक रहना होगा। हमें समावेशी और सशक्त 

समाज की रचना करनी होगी। आज के माहौल में तो हमें ऐसा लगता है "बीच भँवर में फंस गई नैया, खेवनहार कहां पर हो!" 

वरिष्ठ साहित्यकार राज बहादुर राज ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा वैदिक युग में भारतीय नारी बहुत सशक्त थी, सिर्फ मध्य काल में जब आक्रांताओं ने देश पर शाशन किया तभी भारतीय नारी की अबला जैसी दशा हो गई थी। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के प्रसिद्ध काव्य-ग्रंथ 'यशोधरा' में इस दशा पर एक छंद है: "अबला जीवन हाय, तुम्हारी यही कहानी, आँचल में है दूध और आँखों में पानी।" उन्होंने इसके उलट लिखीं डॉ. शशि तिवारी की कविता की पंक्तियों के साथ अपनी बात प्रभावी ढंग से कही। 

कवियत्री डॉ. शशि तिवारी ने अपनी मां जीया के व्यक्तित्व और कृतित्व को अपने शब्दों में बयां करते हुए कहा कि यह पुस्तक मेरी वैयक्तिक अभिव्यक्ति नहीं है बल्कि यह पुस्तक दुनियाभर की माताओं को समर्पित है।

गायिका-कवियत्री शिवरंजनी तिवारी ने अपनी कविता सुनाई-

*"तुम ही घर की धड़कन थीं, तुम ही परिवार का मान 

तुम सब रिश्तों की डोरी , तुम ही आन बान और शान।

हमेशा यादों में ज़िंदा रहोगी , हमारी प्यारी जीया 

सादा जीवन काया कोरी , तुम ही हमारा अभिमान।"*

शिवरंजनी ने माँ को समर्पित डॉ. शशि तिवारी द्वारा रचित एक गीत भी सुनाया-

*"दुनियाँ में माँ जैसा कोई नहीं है।

माँ मीठी दूध-मलाई जैसी है 

सर्दी में ऊन-सलाई जैसी है 

माँ की रोटी जैसा कोई नहीं है...।"*


गायक परमानंद ने हिंडोला गायकी की प्रस्तुतीकरण करते हुए एक मल्हार सुनाई वहीं भगवान स्वरूप ने ढपली पर संगत की।

*"झूलन चलो हिंडोरला वृषभान नंदिनी,

सुंदर कदंब की डाली, झूला पढ़ रहियो है प्यारी...!"*


दो लघु फिल्में भी दिखाईं गईं। जिनका लेखन, निर्देशन और निर्माण शिवरंजनी तिवारी और मेजर शेखर द्वारा किया गया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. ब्रजेश रावत थे। वक्ताओं में संजय तिवारी, पं. योगेश शर्मा योगी, अनिल जैन, डॉ. महेश धाकड़ शामिल थे। ब्रिगेडियर सौरभ तिवारी, कर्नल राजीव तिवारी, रजनी पांडेय, रश्मि शांडिल्य, शिप्रा तिवारी, रूपम, भावना, डॉ. विशाल, ममता, कुमकुम रघुवंशी, संजय शर्मा, विनोद दीक्षित, सुधांशु पांडेय, डॉ. नीलम भटनागर, अनिल जैन, संजय गुप्त, शरद गुप्त, राजकुमार दीक्षित, राजेंद्र शर्मा, डॉ. रुचिरा प्रसाद, स्वाति माथुर, श्वेता, जितेंद्र दीक्षित, आचार्य उमा शंकर, अनिल अरोड़ा संघर्ष आदि भी थे। धन्यवाद तिवारी परिवार के सदस्यों ने दिया।

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