यूपी वन विभाग, वाइल्डलाइफ़ एसओएस और पुलिस ने अवैध वन्यजीव तस्करी गिरोह का किया भंडाफोड़ - शिकारी गिरफ्तार; तेंदुए की दस खालें ज़ब्त
आगरा। वाइल्डलाइफ़ SOS और वन अधिकारियों के बीच गुप्त रूप से जानकारी जुटाने और आपसी सहयोग के परिणामस्वरूप, हाल के वर्षों में भारत में तेंदुए की खाल की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक संभव हो पाई।
वन्यजीव अपराध के मामले में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए, उत्तर प्रदेश वन विभाग और पुलिस ने वाइल्डलाइफ़ एसओएस से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर शिकार और तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफ़ाश किया। इस कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया और तेंदुए की दस खालें ज़ब्त की गईं।
विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर, मध्य भारत में सक्रिय शिकारियों और तस्करों के एक गिरोह का, बेहतरीन तालमेल और सर्जिकल सटीकता के साथ चलाए गए ऑपरेशन के ज़रिए पर्दाफ़ाश किया गया।
कई महीनों तक, वाइल्डलाइफ़ एसओएस की एंटी-पोचिंग यूनिट 'फ़ॉरेस्ट वॉच' ने मिली जानकारी की बारीकी से जाँच की, संदिग्धों की गतिविधियों पर नज़र रखी और प्रवर्तन अधिकारियों को सूचित करने से पहले यह पक्का किया कि ज़ब्त की गई चीज़ें असली तेंदुए की खाल ही थीं।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस से मिली जानकारी के आधार पर, उत्तर प्रदेश वन विभाग ने कई एजेंसियों के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया। परिणामस्वरूप तेंदुए की दस खालें ज़ब्त की गईं और चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया, जो अभी वन विभाग और पुलिस की हिरासत में हैं। अधिकारी अपराधियों के कनेक्शन की जाँच कर रहे हैं और यह भी पता लगा रहे हैं कि तेंदुओं को कहाँ मारा गया था और तस्कर पहले कहाँ अपना कारोबार करते रहे हैं।
वन्यजीव संरक्षण संस्था ‘वाइल्डलाइफ़ SOS' भी इस मामले में वन विभाग को कानूनी सहायता दे रहा है।
*आगरा के डीएफओ, IFS अधिकारी राजेश कुमार ने कहा*, "वाइल्डलाइफ़ एसओएस से मिली ठोस जानकारी की वजह से हम सही समय पर आरोपियों को पकड़ पाए और वन्यजीव अपराध से जुड़ी अवैध सामग्री ज़ब्त कर पाए। मामले की जांच चल रही है और हम इस अवैध नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों का पता लगाने और दोषियों पर वाइल्डलाइफ़ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
*वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा*, "यह एक बहुत ही दुखद घटना है, जब इंसानी लालच की वजह से दस तेंदुओं की जान चली गई! दस तेंदुओं की खालों की यह बरामदगी इस बात की कड़ी याद दिलाती है कि संगठित वाइल्डलाइफ़ अपराध हमारे देश की जैव-विविधता की संपत्ति के लिए खतरा हैं। वाइल्डलाइफ़ तस्करों के खिलाफ हर सफल ऑपरेशन आपराधिक नेटवर्क को तोड़ता है और खतरे में पड़ी वन्यजीव प्रजातियों की रक्षा करता है। हम इस सफल ऑपरेशन के लिए वन विभाग और पुलिस को बधाई देते हैं। वाइल्डलाइफ़ एसओएस ऐसे नेक कामों के लिए सहयोग और कानूनी मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।"
भारतीय तेंदुए (पैंथेरा पार्डस फुस्का) को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित किया गया है, जिससे उसे भारत में सबसे ऊंचे स्तर की कानूनी सुरक्षा मिलती है। इसके बावजूद, संगठित आपराधिक नेटवर्क और अवैध वन्यजीव बाज़ारों के कारण खाल और शरीर के अंगों के लिए अवैध शिकार जंगली तेंदुओं की आबादी के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है।

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