आगरा। संस्कृत-हिंदी भाषा के दिग्दर्शन में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, शिल्प, शैली को समर्पित देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था आगरा के गौरवशाली तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय अभिभावक दिवस की गौधूलि बेला पर "हृदयंगम्~१०१" के रसानंद में कंठोष्ठ्य उत्सव का आयोजन बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ।
मुख्य अतिथि कवि सम्राट डॉ.राजेन्द्र मिलन ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य की प्रगति के संवाहक होते हैं अभिभावक! माता-पिता ही मात्र अभिभावक नहीं होते अपितु जो सुसंस्कृति दे...वे सभी अभिभावक हैं। दादा-दादी, गुरू अपितु रिश्ते के हर बड़े-बुजुर्ग भी हमारे अभिभावक हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कार भारती बृज प्रांत महामंत्री नंदनंदन गर्ग ने कहा कि अपने से बड़े सभी अभिभावक हैं जिनका सम्मान करना स्वयं का सम्मान है।
मुख्य वक्ता नरेन्द्र शर्मा एडवोकेट ने कहा कि अभिभावक हमारे दैनिक जीवन में ऊर्जा के स्रोत का काम करते हैं विशिष्ट अतिथि डॉ.अमिता त्रिपाठी ने कहा कि माता-पिता भाग्य तो अभिभावक हमारे सौभाग्य हैं।
सरस्वती वंदना बाल कवयित्रीद्वय तनिष्का शर्मा व गार्गी शर्मा ने कोकिल कंठ से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कंठोष्ठ्य उत्सव का संचालन कवि डॉ.यशोयश और धन्यवाद ज्ञापित संजय कुमार एडवोकेट ने किया।
काव्य पाठ करने वालों में सर्व श्री डॉ.शेषपाल सिंह शेष, कवि डॉ.यशोयश, उमाशंकर पाराशर, डॉ.महेश गोपाली, संजय कुमार एडवोकेट, अशोक कुमार शर्मा, सौरभ कुमार वर्मा, राकेश कुमार शर्मा, डॉ.रामेन्द्र शर्मा रवि भारत सिंह एडवोकेट, पवन दिवाकर, विवेक कुमार वार्ष्णेय, टिंकू सम्बरिया आदि ने अपनी-अपनी रचनाओं से अंतर्राष्ट्रीय अभिभावक दिवस को ऊंचाइयाँ प्रदान कीं।

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