बच्चों में भी लाइफस्टाइल डिजीज का खतरा: शहरी बच्चों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड के कारण डायबिटीज और हाइपरटेंशन का खतरा निरंतर बढ़ रहा



आगरा। भारत में लाइफस्टाइल डिजीज (जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों) में पिछले कुछ वर्षों में लगभग दोगुनी की बढ़ोतरी हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में समग्र बीमारियों का बोझ 7.5 प्रतिशत से बढ़कर 13.1 प्रतिशत हो गया है। भारत में बैक्टीरिया और वायरस से होने वाले संक्रामक रोगों में तो कमी आई है, लेकिन लाइफस्टाइल 

डिजीज जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन), मोटापा और दिल की बीमारियों का दायरा बेहद चिंताजनक रूप से बढ़ा है। युवाओं और बच्चों में भी लाइफस्टाइल डिजीज का खतरा बढ़ा है। यह बात गुरुवार को होटल क्लार्क शिराज में कार्डियो डायबिटीज रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ आगरा के तत्वाधान में आयोजित एक दिवसीय कार्डियो मेटाबॉलिक जीआईटी एंड रेसपीरेट्ररी कॉन्क्लेव-2026 के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली मेदांता हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हर्षवर्धन पुरी ने कही। अन्य प्रमुख वक्ता गुड़गांव आर्टमिस हॉस्पिटल कि डॉक्टर वर्तिका विश्ववानी के अनुसार पूर्व में लाइफस्टाइल डिजीज बीमारियां बुजुर्गों में देखी जाती थीं, लेकिन अब 20 से 30 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। शहरी बच्चों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड की निर्भरता के कारण उनमें भी डायबिटीज, हाइपरटेंशन और मोटापे से कैंसर का खतरा बढ़ गया है। 13 प्रकार के कैंसर है जो मोटापे से होते हैं, जिसमें ब्रेस्ट कैंसर और बच्चेदानी का कैंसर प्रमुखता से शामिल है। 2025 के आंकड़े के अनुसार बच्चों में मोटापे में विश्व में दूसरा स्थान भारत का है। इससे पूर्व एक दिवसीय कार्डियो मेटाबॉलिक जीआईटी एंड रेसपीरेट्ररी कॉन्क्लेव-2026 का शुभारंभ कार्डियो डायबिटीज रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ आगरा के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राजीव किशोर, प्रेसिडेंट डॉ. बाईबी अग्रवाल, को ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. डीपी अग्रवाल, को ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. अशोक शिरोमणि, ऑर्गेनाइजिंग ट्रेजरार डॉ. तरुण सिंघल, ऑर्गेनाइजिंग साइंटिफिक सेक्रेटरी डॉ. केके विश्ववानी, ऑर्गेनाइजिंग ज्वाइंट साइंटिफिक सेक्रेटरी डॉ. प्रशांत प्रकाश द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। स्वागत उद्बोधन ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा द्वारा किया गया। ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राजीव किशोर ने बताया कि कार्डियो डायबिटीज रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ आगरा के द्वारा एक दिवसीय कार्डियो मेटाबॉलिक जीआईटी एंड रेसपीरेट्ररी कॉन्क्लेव-2026 के आयोजन का उद्देश्य लाइफस्टाइल डिजीज के बढ़ते  कारण, बचाव और आधुनिक उपचार पर मंथन करना है। इस अवसर पर देशभर के दो सौ से अधिक विशेषज्ञों ने लाइफस्टाइल डिजीज संबंधित रोगों की रोकथाम के लिए पैनल डिस्कशन और डिबेट हुए। प्रेसिडेंट डॉ. बाईबी अग्रवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। व्यवस्थाएं अनिल गोयल और समक्ष जैन ने संभाली।

कॉन्क्लेव में वक्ताओं के रूप में  गाजियाबाद से डॉ. पंकज अग्रवाल, आगरा से प्रो. डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. भूपेंद्र आहूजा, डॉ. धर्मेंद्र तिवारी डॉ. बीके अग्रवाल, डॉ. अरविंद जैन, लखनऊ से डॉ. राजीव अवस्थी ने लाइफस्टाइल डिजीज पर अपने विचार रखें।

कैंसर के रूप में उभर रहा मोटापा: डॉ. वर्तिका

गुड़गांव आर्टमिस हॉस्पिटल कि डॉ. वर्तिका विश्ववानी ने ओबेसिटी एज़ द न्यू कार्सिनोजेन, मिथ ऑफ मेजरेबल रिस्क टॉपिक पर व्याख्यान दिया। उनका कहना था कि मोटापे का एक नए कैंसर-कारक (कार्सिनोजेन) के रूप में उभरना"। इसका मतलब है कि अत्यधिक वजन या मोटापा अब तंबाकू और शराब की तरह कैंसर पैदा करने वाले प्रमुख कारकों में गिना जाता है।जोखिम के मापने का मिथक"। यह वाक्यांश इस वैज्ञानिक बहस को दर्शाता है कि कैंसर के खतरे को केवल एक बीएमआई नंबर से सटीक रूप से नहीं मापा जा सकता, क्योंकि हर शरीर पर अतिरिक्त चर्बी का प्रभाव अलग होता है.


गैर संचारी रोगों से बचाव के उपाय: डॉ. राजीव किशोर

ऑर्गेनाइजेशन सेक्रेटरी के डॉ. राजीव किशोर अनुसार इन गैर-संचारी रोगों को अपनी दिनचर्या में छोटे और अनुशासित बदलाव करके रोका या नियंत्रित किया जा सकता है। सक्रिय दिनचर्या में प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट योग, प्राणायाम, या वॉक (पैदल चलना) के लिए निकालें। डेस्क जॉब में हर घंटे कुछ मिनट के लिए स्ट्रेचिंग करें। आहार में सुधार करें। खाने में ऊपर से नमक लेना बंद करें, अचार, पापड़ और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से परहेज करें। घर का बना संतुलित भोजन अपनाएं।


नियमित कराएं हेल्थ चेकअप: डॉ. सुभाष चंद्रा 

ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के अनुसार शरीर की नियमित जांच कराएं। 30 वर्ष की उम्र के बाद समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल मॉनिटर करते रहें ताकि बीमारी का शुरुआती स्टेज में ही पता चल सके, जिससे उचित समय पर आधुनिक उपचार मिलने से रोग पर अंकुश लगाया जा सके।

जैविक अमरता संभव है: डॉ. नरेंद्र 

आगरा के प्रोफेसर डॉक्टर नरेंद्र मल्होत्रा ने अपने टॉपिक कैन वी अटैन इमॉर्टलिटी. दा वे फॉरवर्ड. एंड व्हेयर वी स्टैंड टुडे। के माध्यम से बताया गया कि विज्ञान के अनुसार, जैविक अमरता (जैविक रूप से कभी न मरना) वर्तमान में संभव हो सकती है। विश्व की 6 बड़ी कंपनियां इस पर कार्य कर रही है। रसिया में पहला ह्यूमन ट्रायल प्रारंभ हो गया है। एलन मास्क ने मृत्यु को एक सॉफ्टवेयर की तरह बताया है सॉफ्टवेयर को रिसेट कर दो और जीवित रहो।

फेफड़ों की जांच करता है स्पाइरोमेट्री: डॉ. प्रशांत 

डॉ. प्रशांत प्रकाश ने स्पाइरोमेट्री परीक्षण के विषय में जानकारी देते हुए विचार रखे कि यह एक सामान्य फेफड़ों का परीक्षण है, जिससे सांस मापी जाती है। यह जांचता है कि आपके फेफड़े कितनी अच्छी तरह काम करते है। फेफड़ों की कार्यक्षमता का परीक्षण कहा जाता है। यह एक ऐसी जांच है, जो यह बताती है कि आपके फेफड़े कितने स्वस्थ हैं और सांस लेने की प्रक्रिया में कोई रुकावट या कमजोरी तो नहीं है। उन्होंने परीक्षण संबंधित अन्य जानकारियों से भी अवगत कराया।

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