भागवत कथा ऐसी कथा है जिससे साक्षात् नारायण प्राणी के हृदय में समा जाते हैं.. आचार्य रामकृष्ण शास्त्री जी महाराज



आगराः आचार्य रामकृष्ण शास्त्री जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य के हृदय में समा जाती है जिससे मन के भय विकार और सभी अवसाद दूर हो जाते हैं और नारायण हृदय में समा जाते हैं जिससे मनुष्य जीवन का कल्याण हो जाता हैँ । 

महाराज जी ने कहा कि अगर हमारा मन पवित्र नहीं है वाणी शुद्ध नहीं है तब तक भगवान कृपा नहीं हो सकती भगवान की कृपा पाने के लिए हमें मन कर्म और वचन से सच का साथ देना चाहिए और प्रभु का नाम जाप सदैव जपते रहना चाहिए।

महाराज ने भगवान के चौबीस अवतारों की कथा के साथ-साथ समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है। कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का चितन मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का चितन मंथन चलता रहता ।

कथा के प्रारंभ में श्री भागवत भगवान का पूजन आरती सतीश चन्द्र पत्नी श्रीमती अनुराधा जी ने उतारी..

इस अवसर पर आयोजनकर्ता नत्थीलाल मालोनिया, परीक्षित अजय कान्त मालोनिया पत्नी श्रीमती लता कान्त, यज्ञपति सतीश चन्द्र पत्नी श्रीमती अनुराधा, दिनेश चन्द्र, श्री सुरेश चन्द्र, गोपाल प्रसाद, शुभम सिंह करमवीर सिंह, सौरभ सिंह, यशवीर सिंह, तेजस्वी कान्त, अभिषेक सिंह, निधि, प्रगति, लावण्या कान्त सुकृति सिंह, मेघा सिंह, हनिष्का सिंह एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

Comments