चैत्र नवरात्रि 2026 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक रहेगा : प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने की विधि : डॉ शिल्पा जैन


DESK | चैत्र नवरात्रि 2026 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक रहेगा। इस नवरात्रि मां पालकी पर सवार होकर आ रही हैं जो कि रोग कष्ट महामारी का संकेत देता है और हाथी सेवा से वापस जाएंगी जो शुभ माना गया है, अच्छी वर्षा और धन धान की वृद्धि का संकेत देता है।

प्रथम दिन

मां शैलपुत्री-

नवरात्रि के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। यह दिन आध्यात्मिक जागरण और नई ऊर्जा का प्रारंभ माना जाता है। माँ शैलपुत्री का अर्थ है पर्वतराज की पुत्री। ये हिमालय की बेटी हैं, इसलिए इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। पिछले जन्म में ये सती थी, जो बाद में पुनः जन्म लेकर पार्वती के रूप में प्रकट हुई। यह नवदुर्गा का पहला स्वरूप है और संपूर्ण नवरात्रि साधना का आधार मानी जाती है। माँ शैलपुत्री मूलाधार चक्र को नियंत्रित करती हैं। मूलाधार चक्र जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास, सुरक्षा और आधार देता है।नवरात्रि के पहले दिन इस चक्र पर ध्यान करने से जीवन जीवन की नींव मजबूत होती है। माँ शैलपुत्री का रंग हल्का पीला है। यह रंग शुद्धता, सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत को दर्शाता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। माँ शैलपुत्री को शुद्ध घी का भोग अतिप्रिय है। शुद्ध घी का भोग लगाने से रोगों से मुक्ति, शरीर में शक्ति और ऊर्जा मानसिक शांति प्राप्त होती है। माँ का वाहन वृषभ (बैल) है, हाथों में त्रिशूल, कमल, पुष्प या स्वरूप शक्ति और सरलता दोनों का प्रतीक है। माँ शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं, मन स्थिर होता है। आध्यात्मिक उन्नति की शुरुआत होती है। कुंडली में चंद्रदोष भी शांत होता है। ओम देवी शैलपुत्राई नमः मंत्र का जाप 108 बार करें। पीपल या तुलसी के पास दीपक जलाएं। मूलाधार चक्र पर ध्यान करें। इस प्रकार मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन सफलता की ओर अग्रसर होता है।


- डॉ शिल्पा जैन 

एस्ट्रोलोजेर

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