पुराने रिश्तों में छिपे दर्द, उलझन और जीवन की आपाधापी को उजागर कर गया नाटक "एक टूटी हुई कुर्सी"



आगरा। गुरूवार को ताजमहोत्सव 2026 में सदर मंच पर हुए नाट्य मंचन के दौरान उस वक़्त थम गया जब नाटक के पात्रों ने र्दशक दीर्घा में बैठे श्रोताओं को उनके पुराने रिश्तों में छिपे दर्द, उलझन और जीवन की आपाधापी को उजागर किया। नाटक था "एक टूटी हुई कुर्सी"  नाटक में कलाकारों ने वर्तमान समय की सच्चाई और परेशानियों पर प्रकाश डाला । नाटक के दौरान लगा क्या वाकई “एक टूटी हुई कुर्सी” कुछ कहती है ? 

इस नाटक को युवा निर्देशिका मन्नू शर्मा के निर्देशन में नाट्यकर्म थिएटर द्वारा प्रस्तुत किया गया।

यह नाटक इस्माइल चुनारा के मूल अंग्रेजी नाटक “ए ब्रोकन चेयर” का हिंदी में अनुवाद “एक टूटी हुई कुर्सी”, से लिया गया है जिसका हिंदी में रूपातंरण उमा झुनझुनवाला ने किया है।  

ये नाटक तीन दोस्तों के पुराने रिश्तों में छिपे उस दर्द उलझन, जीवन की आपाधापी को उजागर करता है। 

इस नाटक के पात्रों के सशक्त अभिनय प्रस्तुति ने इस नाटक को दर्शकों के दिलों तक पहुँचा दिया और हर दर्शक इसे अपने जीवन से कहीं न कहीं जोड़ता हुआ दिखा। 

पात्र परिचय

रवि की भूमिका में थे -  शैलेश   राणा

 अज़ीज़ की भूमिका में थे - सार्थक भारद्वाज 

सुमित्रा की भूमिका निभायी मन्नू शर्मा ने।

 नाटक की संगीत संचालन- दीपक निगम 

संगीत परिकल्पना- अक्षय प्रताप 

प्रकाश परिकल्पना- राम गंगवार 

वस्त्र सज्जा- रेखा शर्मा 

मंच व्यवस्था- सचिन गुप्ता 

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