*शहरीकरण और पश्चिमीकरण के कारण बच्चों में बढ़ रहे एलर्जिक रोग, दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस मिड टर्म पीईडी ऑल ईआर कॉन-2026 का हुआ समापन
- एलर्जिक रोगों में वायु प्रदूषण कर रहा साइलेंट किलर का कार्य
- बाहरी दूध से बच्चों में बढ़ रहे एलर्जी संबंधित रोग
आईएपी के तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस मिड टर्म पीईडी ऑल ईआर कॉन-2026 का हुआ समापन
- देशभर के विशेषज्ञों ने कॉन्फ्रेंस में पैनल डिस्कशन, वार्ता और चर्चा की
आगरा। शहरीकरण और पश्चिमीकरण के कारण निरंतर बढ़ रहे एलर्जी संबंधित रोग। प्रकृति से दूर होना और आधुनिक जीवन शैली को अपनाने के कारण ही बच्चों में एलर्जिक रोगों में इजाफा हो रहा है। यह बात वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एच परमेश्वर ने कही। वह इंडियन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स आगरा के तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस मिड टर्म पीईडी ऑल ईआर कॉन-2026 के दूसरे दिन रविवार को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उनका कहना था कि वायु प्रदूषण एलर्जिक रोगों के लिए साइलेंट किलर का कार्य कर रहा है। इससे सांस, त्वचा और पेट संबंधित एलर्जिक रोग से बच्चे पीड़ित हो रहे हैं। उन्होंने प्रकृति प्रेम और आधुनिक लाइफस्टाइल में बदलाव कर सामान्य जीवन यापन करने की सलाह भी दी। कॉन्फ्रेंस में अन्य प्रमुख वक्ता के रूप में दिल्ली के पेट, लीवर और आंतों के विशेषज्ञ डॉक्टर सरथ गोपालन के अनुसार जो बच्चे बाहरी दूध या मिक्स दूध पीते हैं। उनमें सांस, आंत और स्क्रीन में एनिमल्स प्रोटीन एलर्जी जैसे रोग अक्सर पाए जाते हैं। इनके लक्षण शौचालय के रास्ते से खून आना, सांस फूलना, पेट में मरोड़ होना, लूज मोशन होना आदि शामिल है। उन्होंने रोगों से बचाव के लिए भी टिप्स दिए। इस दौरान चीफ ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. आरएन द्विवेदी, डॉ. प्रदीप चावला, आईएपी आगरा के अध्यक्ष डॉ, संजीव अग्रवाल ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राहुल पैंगोरिया, फाइनेंस सेक्रेटरी डॉ. स्वाति द्विवेदीने कॉन्फ्रेंस की जानकारी देते हुए बताया कि दो दिवसीय कांफ्रेंस में देशभर से आए विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों में अपने विचार रख एलर्जिक संबंधित रोगों के कारण, बचाव और उपचार पर मंथन किया। इस प्रकार की कॉन्फ्रेंस से चिकित्सकों में आपस में अनुभव साझा किए जाते हैं, जिससे मरीजों को उचित इलाज मिल सके। कॉन्फ्रेंस के अंत में सम्मान समारोह का आयोजन कर कॉन्फ्रेंस को सफल बनाने के लिए वाले सदस्यों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजीव कृषक, डॉ. आर एन शर्मा, डॉ. राकेश भाटिया, डॉ. संजय सक्सेना, डॉ. अरुण जैन, डॉ. नीरज यादव, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. सोनिया भट्ट, डॉ. अश्वनी यादव, डॉ. अतुल बंसल, डॉ. अभिषेक गुप्ता मौजूद रहे।
50 से अधिक पढ़े गए शोध पत्र
आईएपी आगरा अध्यक्ष डॉ संजीव अग्रवाल के अनुसार दो दिवसीय कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। 50 से अधिक शोध पत्र पड़े गए जिससे आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से चिकित्सकों को उचित इलाज करने में मदद मिलेगी।
नवजात शिशु सुरक्षा पर कार्यशाला
चीफ ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. आरएन द्विवेदी और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राहुल पैंगोरिया के अनुसार कॉन्फ्रेंस में इंडियन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स द्वारा नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें चिकित्सकों को नवजात शिशु से संबंधित प्रमुख जानकारियों से अवगत कराया गया। यह कार्यशाला देशभर में 10 मई को आयोजित की गई।
छह माह तक के बच्चों के लिए स्तनपान जरूरी
फाइनेंस सेक्रेटरी डॉ स्वाति द्विवेदी के अनुसार कॉन्फ्रेंस में एलर्जिक रोगों की रोकथाम पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की गई है। नवजात से 6 माह तक के शिशु के लिए स्तनपान है जरूरी। स्तनपान करने वाले बच्चों को एलर्जिक रोग होने का खतरा अन्य बच्चों की तुलना में काम होता है।

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