माधुर्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में कवि सम्मेलन हुआ संपन्न

 

आगरा माधुर्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में सप्त ऋषि अपार्टमेंट में महावीर जयंती के उपलक्ष्य में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, माधुर्य की संस्थापक अध्यक्ष निशिराज ने जैन धर्म की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए सरस्वती वंदना के द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया और कहा कि भारतीय संस्कृति पर समय समय पर ज्ञानात्मक एवं रचनात्मक गोष्ठियों का आयोजन करना ही माधुर्य संस्था का मुख्य उद्देश्य है। संस्था के संरक्षक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ राजेंद्र मिलन की समसामयिक राजनीति पर व्यंग्य रचना थी - स्वयंभू हम हैं तिकड़मबाज

रे भैया पूरे तिकड़मबाज...मुख्य अतिथि डॉक्टर शशि गोयल ने हिंदी साहित्य के  बाल विकास  पर क्रमशः प्रकाश डालते हुए एक सारगर्भित आलेख के बाद बालगीत पढ़ा -भोर होते ही सूरज की बग्घी से कूद आती है नन्ही किरण।

संयोजक माधुर्य साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था की अध्यक्ष  निशि राज ने रचना प्रस्तुत की- किसी के अंतर्मन की थाह पाना कितना असंभव.। कार्यक्रम का कुशल संचालन भी किया निशि राज ने।

लोक साहित्य के प्रणेता डॉ. राजीव शर्मा 'निस्पृह' का लोक गीत था -मेरे भैया धरती पै मति  करौ अत्याचार,करौ बाकूँ दुलार ।

आमंत्रित कवियों में अशोक अश्रु विद्यासागर,दुर्ग विजय सिंह 'दीप',राकेश निर्मल ,प्रकाश गुप्ता 'बेबाक', शैल अग्रवाल "शैलजा",अशोक गोयल, आचार्य उमाशंकर पाराशर,सुधा वर्मा एवं राजकुमार ने प्रबुद्ध श्रोताओं को रस विभोर कर दिया। उल्लेखनीय प्रसंग यह रहा कि नंद नंदन गर्ग ने भी अपनी भूली बिसरी काव्य प्रतिभा की बानगी  से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

  प्रायोजक ब्रह्मप्रकाश गोयल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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