आगरा। साहित्य संगीत संगम के तत्वावधान में ग्रीन हाउस भोगीपुरा पर वसंत उत्सव का आयोजन किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए चंद्रशेखर शर्मा जी कहा आज सुखद संयोग है की एक और बसंत उत्सव मनाया जा रहा है ,पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जन्मदिन है ,मां सरस्वती का प्रकट्य दिवस है और गणतंत्र दिवस की आहटें आ रही हैं साथ ही आज बेटी दिवस भी है अतः आप सबसे अनुरोध है कि आप इन सारे पर्वों को समेट कर अपनी बात करें।
इस अवसर पर संतोषी सदा सुखी नाट्य प्रस्तुति के कलाकारों का सम्मान डॉक्टर राजेंद्र मिलन ने किया।
मुख्य अतिथि प्रतापगढ़ से पधारे हुए विख्यात साहित्यकार एवं चंद्रशेखर आजाद महाकाव्य के प्रणेता श्री प्रेम कुमार त्रिपाठी थे उन्होंने कहा *हेकड़ी भुला दिया शेखर ने लंदन के सौदागर का /चंद्रशेखर का कद बढ़ता गया बढ़ता ,बढ़ता गया दिवाकर सा* विशिष्ट अतिथि श्री अजय कुमार मिश्रा ने कहा *खिले सुमन उपवन महकने लगा आया वसंत मन बहकने लगा* डॉ राजेंद्र मिलन ने अध्यक्ष पद से अपनी गरिमा के अनुरूप पढ़ा *युग हुआ डिजिटल है आने को शुभ कल है आचरण का होना है प्रत्यावर्तन आओ गणतंत्र करें तेरा अभिनंदन* वसंत के आगमन पर हरीश अग्रवाल के शब्द थे *जीवन के मधुबन में झांका तो पुष्पों की पत्तियां है भिन्न रंग की कुछ आतुर से खिलने तो कुछ थी सपने में अपने ढंग की* इसी में सुर मिलाते हुए भाई हरीश भदोरिया के शब्द थे *तन पर चादर ओढ़ वसंती लाई नहीं बहार हर्षित झूमे कहे मेदिनी जाऊं मैं बलिहार* डॉक्टर रमेश आनंद, असीम आनंद ,भाई अशोक अश्रु, दुर्ग विजय सिंह दीप, मयंक त्रिपाठी, चंद्रशेखर शर्मा ,डॉक्टर सुभाष सिंह, डॉक्टर शैल अग्रवाल , डॉ सुषमा सिंह, राम वर्मा श्याम, आदि ने भी संदर्भित रचनाओं का पाठ किय।सुशील सरित ने *वसंत और फिल्मी गीत* आलेख पढ़ा जिसमें उन्होंने कहा कि वसंत पर पहला ज्ञात गीत फिल्म हुस्नबानो में आया था और उसके बोल थे आई वसंत ऋतु मधुमति किंतु सर्वाधिक लोकप्रिय गीत फिल्म बसंत बहार में पंडित भीमसेन जोशी और मन्ना डे साहब ने शंकर जयकिशन के निर्देशन में प्रस्तुत किया था जिसके बोल थे केतकी गुलाब जूही चंपक वन फूले ,इसके अतिरिक्त जिस देश में गंगा बहती है, राजा और रंक, अंगुलिमाल आदि फिल्मों में भी वसंत संदर्भित गीत आए थे। इस अवसर पर भाई रुपेश मल्होत्रा ,कृषिका मल्होत्रा ,सुधीर शर्मा, भूमि माथुर, मंजू मथुर, मयंक त्रिपाठी माया त्रिपाठी प्रकाश ,संजय अग्रवाल आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। धन्यवाद ज्ञापित किया श्री जग मोहन गुप्ता ने।

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