पुराने रिश्तों में छिपे दर्द, उलझन और जीवन की आपाधापी को उजागर कर गया नाटक एक टूटी हुई कुर्सी


ताजनगरी में साल के आखिरी सप्ताह में पुराने रिश्तों में छिपे दर्द, उलझन और जीवन की आपाधापी को उजागर कर गया नाटक एक टूटी हुई कुर्सी। शनिवार को आगरा के यूथ हॉस्टल में आयोजित हुए नाटक में कलाकारों ने वर्तमान समय  की सच्चाई और परेशानियों पर प्रकाश डाला । नाटक के दौरान लगा क्या वाकई “एक टूटी हुई कुर्सी” कुछ कहती है ? इस नाटक को युवा निर्देशिका मन्नू शर्मा के निर्देशन में नाट्यकर्म थिएटर द्वारा प्रस्तुत किया गया।

नाटक की निर्देशिका एवं नाट्यकर्म संस्था की सचिव मन्नू शर्मा ने बताया कि यह नाटक इस्माइल चुनारा के मूल अंग्रेजी नाटक “ए ब्रोकन चेयर” का हिंदी में अनुवाद “एक टूटी हुई कुर्सी”, से लिया गया है जिसका हिंदी में रूपातंरण उमा झुनझुनवाला ने किया है।  

ये नाटक तीन दोस्तों के पुराने रिश्तों में छिपे उस दर्द उलझन, जीवन की आपाधापी को उजागर करता है। जो वर्षों से उनके भीतर दबी हुई थी।

इस नाटक के पात्रों के सशक्त अभिनय प्रस्तुति ने इस नाटक को दर्शकों के दिलों तक पहुँचा दिया और हर दर्शक इसे अपने जीवन से कहीं न कहीं जोड़ता हुआ दिखा। 

कार्यक्रम में मौजूद रहे अतिथियों को नाट्यकर्म थिएटर द्वारा श्री राजेश अग्रवाल (रसोई रत्न) के सुपुत्र अनुराग अग्रवाल, संजीव वशिष्ठ ( वरिष्ठ अधिवक्ता), वरिष्ठ रंगकर्मी अजय दुबे को सम्मानित किया गया। 

कार्यक्रम के अतिथि श्री राजेश अग्रवाल (रसोई रत्न) के पुत्र अनुराग अग्रवाल ने कहा कि थियेटर सभी को करना चाहिए खासतौर पर युवाओं को इससे जुड़ना चाहिए, सिर्फ एक्टर बनने के लिए नहीं, इससे खुद के अंदर भी एक आत्मविश्वास बढ़ता है, खुद का विकास होता है तो वहीं अपनी बात कहना आती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री संजीव वशिष्ठ (वरिष्ठ अधिवक्ता) ने कहां कि थियेटर प्रथा आगरा से विलुप्त होती जा रही है। इस तरह के नाटक शहर में होते रहने चाहिए। वहीं यूथ हॉस्टल में उन्होंने साहित्यिक कार्यक्रम होते देखा हैं, लेकिन नाटक होते हुए पहली बार देखा है। उन्होंने यूथ हॉस्टल को थियेटर के रूप में परिवर्तित करने के लिए संस्था को साधुवाद दिया, और आगे भी इस तरह के नाटकों को शहर में होने के लिए जोर दिया।

रवि की भूमिका में थे रंजीत गुप्ता, अज़ीज़ की भूमिका में थे सार्थक भारद्वाज, सुमित्रा की भूमिका निभायी कनिका सिंह ने। नाटक की संगीत परिकल्पना एवं संचालन रहा अक्षय प्रताप का। प्रकाश परिकल्पना रही चंद्र शेखर की। 

कार्यक्रम का संचालन शशांक शर्मा ने किया। दीपक निगम राहुल मिलन, सचिन, तुषार वर्मा, नंदिता गर्ग, पृथ्वी पाराशर आदि ने अन्य व्यवस्थाएं संभाली।  


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